मछुआ समुदाय के ऊपर अंग्रेजों की भाति सपा के क्रूरता के गंदे खेल का परिणाम




सम्मानित साथियों अखबार में भ्रामक खबर छप गयी है कि कसरवल रेल आन्दोलन मामले में शहीद हुए अखिलेश निषाद की हत्या के मामले में आरोप तय अखबार में छपी खबर पूर्णतया गलत है। न्यायिक प्रक्रिया में पुलिस के द्वारा लगाये गये आरोपों को मा० न्यायालय में साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करना पड़ता है। इसके तहत कल दिनांक 12.10.2022 को मुझे मा० न्यायालय में पेश होना पड़ा। पुलिस द्वारा लगाये गये आरोप में आन्दोलनकारियों की गोलियों से अखिलेश निषाद मारे गये यह पूर्णतया गलत है। इसका जवाब कल पुलिस द्वारा लगाये गये आरोप के खिलाफ साक्ष्य में दे दिया गया है। न्यायिक प्रक्रिया में आरोप तय नहीं है, अभी आरोप सिद्ध होना बाकी है। पुलिस द्वारा लगाये गये आरोपों को साक्ष्यों के आधार पर गलत साबित करने की प्रक्रिया विचाराधीन है।




जो सही है वो सभी लोग जानते हैं और जो सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाया जा रहा है वो सही नहीं है, आज इसी क्रम में जो कसरवल आंदोलन में पूर्व की सरकार के आतंक मचाया था, बल्कि निषाद समाज सविंधान में सूचीबद्ध मझवार, तुरैहा और शिल्पकार की पर्यायवाची जातियों के हक़ हकूक की प्राप्ति को लेकर था, अपनी माँगो को लेकर धरना प्रदर्शन और शांतिपूर्वक आंदोलन की जगह सविधान देता है और हमारे शांतिपूर्ण आंदोलन में पुलिस ने गोली चलाई, और पुलिसिया गोली में मेरा एक भाई शहीद हो गया, और पुलिस ने खुद स्वीकार किया है की 04 राउंड की फ़ायरिंग की गई है जिसमें दो राउंड की गोली पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मिली है जो कंधे से लादकर सुजित जा रहा था, उसने 156 दाखिल किया और उस मुक़दमे में जज में तत्कालीन पुलिस कर्मियों को लेकर NBW वारंट जारी किया हुआ है।




आज मामले में आरोप पत्र दाखिल होना था, जिसका हमने विरोध किया है, और न्यायालय में अपना पक्ष दाखिल किया है की 302 का आरोप ग़लत है और निराधार है, क्यूँकि प्रक्रिया है, जो चार्जशीट में या एफ़आईआर में लिख जाता है उसके आधार पर कोर्ट संज्ञान लेती है, संज्ञान के बाद लोगों से साक्ष्य लिए जाते हैं, आज आरोप पत्र दाखिल हुआ है, जो भी चार्ज है उसका हमने विरोध किया है, और साक्ष्य को कोर्ट में दिया गया है। आज कुछ असामाजिक तत्व समाज में द्वेष पैदा करना चाहते हैं। समाज जानता है गोली किसने चलाई थी, और फ़र्ज़ी मुक़दमे में मुझे स्वयं फँसाया गया, साथ ही दो बच्चे जो पढ़े लिखे थे जिनसे पुलिस ने पूछा इसमें ज़्यादा पढ़ा कौन है एक ने कहा मैं BSC हूँ और एक ने कहा मैं ग्रैजूएट हूँ उसको फ़र्ज़ी कट्टा लाकर रात में दिखाया और 37 आंदोलनकारी के सामने वो कट्टा लाया गया था, यह सब जाँच का विषय और न्यायिक प्रक्रिया में समय लगता है, क्यूँकि साक्ष्य को वेरिफ़ाई किया जाता है और हमें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है। हमें न्याय ज़रूर मिलेगा।


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