7 जून 2021 निषाद पार्टी मछुआ आरक्षण आक्रोश दिवस पर सरकार व भ्रष्ट अधिकारियों को घेरने की तैयारी
7 June 2021 Preparation to surround government and corrupt officials on Nishad Party Fishermen Reservation Anger Day

सेंसस मैनुअल पार्ट फर्स्ट फॉर उत्तरप्रदेश में अनुसूचित जातियों के पर्यायवाची एवं जेनेरिक नाम दिए गए हैं। इसी मैनुअल के “ऐपेन्डिक्स एफ” के अंतर्गत अंकित अनुसूचित जातियों की सूची के क्रमांक 51 के सामने मझवार को माझी, केवट, मल्लाह, गोड़, राजगोड़ को मझवार की पर्यायवाची एवं जेनेरिक (वंशज) के रूप में मझवार दर्शाया एवं परिभाषित किया गया है। देश की आजादी के बाद से आज तक शासन की दृष्टि में उपरोक्त पर्यायवाची जातियां सवैधानिक रूप से मझवार है यह विधिक रूप से सिद्ध करने के लिए पर्याप्त है कि मझवार, माझी, केवट, मल्लाह परस्पर पर्यायवाची एवं समानार्थी शब्द हैं। सेसस मैनुअल पार्ट फर्स्ट फॉर उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जातियों के पर्यायवाची एवं जेनेरिक नाम का आधार मानकर क्रमांक 4 पर रघुवंशी ठाकुर को बहेलिया का, क्रमांक 11 पर मेंहतर जमादार को बाल्मीकि का जाति प्रमाण पत्र, क्रमांक 24 पर अंकित मोची, रेदास, उतरहा, दखिनहा, रविदास, रैदास आदि को चमार का प्रमाण पत्र, क्रमांक 56 पर पथरकटट् को दबगर का, क्रमांक 30 पर बरेठा, रजक, कनौजिया को धोबी का अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र आसानी से निर्गत हो रहा है। जबकि इसी मैनुअल “ऐपेन्डिक्स एफ” के अंतर्गत अंकित अनुसूचित जातियों की सूची के क्रमांक 51 के सामने मझवार को माझी केवट, मल्लाह, गोड़, राजगोड़ को मझवार का पर्यायवाची एवं जैनेरिक (वंशज) के रूप में मझवार दर्शाया एवं परिभाषित किया गया है। निदेशक हरिजन तथा समाज कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश के पत्राक संख्या “5217\33 74\23″ दिनांक 18.03.1975 के द्वारा पूरे उत्तर प्रदेश के मझवार जाति को अनुसूचित जाति माना गया है और यह पूरे प्रदेश में निवास करती है। वर्तमान समय में निषाद समाज मछुआ समुदाय उत्तर प्रदेश की आरक्षण व्यवस्था में कहीं नहीं रह गया है जिस कारण मछुआ समुदाय संवैधानिक अधिकारों एवं संरक्षण से वंचित होने के कारण विकास की मुख्यधारा से पिछड़ गया है।
भाजपा सरकार और माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, माननीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी, सूबे के मुखिया माननीय श्री योगी आदित्यनाथ जी एवं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय श्री जगत प्रकाश नड्डा जी द्वारा किए गए निषाद आरक्षण व मछुआ समुदाय की राजनीति में भागीदारी का वादा पूरा किए जाने की मांग उपरोक्त माननीयों को संबोधित सभी जिलाधिकारियों के माध्यम से निषाद पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी व समर्थक हजारों की संख्या में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ज्ञापन सौंपा गया है और ज्ञापन के जरिए मांग की गई कि जैसे उत्तराखंड की भाजपा सरकार ने शिल्पकार को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र उनकी सभी उप जातियों को देने के लिए सूची जारी कर शासनादेश संख्या 33-30/17-1/ 2013-13-15/2013 16 दिसंबर 2013 को जारी किया था और साथ ही यह कहते हुए की शिल्पकार जाति नहीं है बल्कि जातियों का समूह है और यह पिछड़ी जाति में नहीं बल्कि अनुसूचित जाति में आते हैं। जिसमें तेली, बड़ई, लोहार, कुम्हार, प्रजापति शिल्पकार सूची में सम्मिलित हैं।
उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में संविधान की सूची में सूचीबद्ध मझवार, गोड़, तुरैहा, खरवार, बेलदार, कोली के सभी उपजातियों केवट, मल्लाह, बिन्द, कश्यप, कंहार, धीवर, रायकवार, बाथम आदि पिछड़ी जाति में नहीं आती हैं लेकिन गलती से पिछड़ी जाति में शामिल कर दिया गया है। पिछड़ी जाति की सूची से हटाकर मछुआ समुदाय की सभी पर्यायवाची जाति एवं उपजातियों की अनुसूचित जाति की एक सूची जारी हो जाएं। जिससे तहसीलों में अधिकारियों और कर्मचारियों में विद्यमान भ्रम यह पिछड़ी में हैं या अनुसुचित में हैं सूची जारी होने और परिभाषित होने से भ्रम दूर हो जाएग, उपरांत आसानी से प्रमाण पत्र बनना शुरू हो जाएगा। यही वादा भारतीय जनता पार्टी ने 2019 के चुनाव से पहले निषाद पार्टी से किया था। केंद्र सरकार का कार्यकाल 1 साल से ऊपर का हो गया परंतु अभी तक केंद्र सरकार ने अपने वादे को नहीं निभाया है। मछुआ समुदाय वादाखिलाफी होने के नाते निराश और उपेक्षित महसूस कर रहा है। इसके हिस्से पर कांग्रेस-बसपा-सपा तीनों पार्टियों के लोगों का कब्जा होता जा रहा है।